अमित शाह की राहुल गांधी को चुनौती, अगर दम है तो हमारे मंत्री से CAA पर डिबेट करे



केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने शनिवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी को चुनौती दी कि वे ये साबित करते दिखाएं कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) भारतीय मुसलमानो की नागरिकता छीन लेगा या फिर कानून को ढंग से पढ़कर आएं। CAA के खिलाफ लोगों को एंटी दलित बताते हुए शाह ने कहा कि नए कानून में ऐसा कुछ है ही नहीं जो मुस्लमानों की नागरिकता को छीने। उन्होंने राहुल गांधी पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया।

अमित शाह ने कहा कि- मैं राहुल गांधी को चुनौती देता हूं कि सीएए को पूरी तरह से पढ़कर आएं। अगर उन्हें इसमें कुछ भी ऐसा दिखता है जिससे भारतीय मुस्लमानों की नागरिकता छीनी जाएगी तो हमारे संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी उनके साथ वाद विवाद करने को तैयार हैं।

बीजेपी के राष्ट्रव्यापी जन जागरण अभियान के तहत सीएए को लेकर कर्नाटका के हुबली में एक सभा में बोलते हुए शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस देश को धर्म के आधार पर बांटने का काम कर रही है।

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, जेडएस, बीएसपी, एसपी पर ये आरोप भी लगाया कि वे वोट बैंक के लिए सीएए का राजनीतिकरण कर रहे हैं। बता दें कि इस रैली में कर्नाटका के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा, केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी और कई बीजेपी नेता इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
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आतंकियों की मदद करने के आरोप में कश्मीर घाटी से गिरफ्तार डीएसपी दविंदर सिंह की जांच को NIA को सौंपे जाने को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। गांधी ने शुक्रवार को ट्वीट कर सवाल किया कि आखिर कौन इस 'आतंकी' को चुप कराना चाहता है।

राहुल गांधी ने लिखा, "आतंकी डीएसपी दविंदर को चुप कराने का सबसे अच्छा तरीका है कि मामले को एनआईए के हवाले कर देना।" उन्होंने दावा किया, "एनआईए की अगुवाई भी एक और मोदी-वाईके कर रहा है, जिन्होंने गुजरात दंगे और हरेन पंड्या की मर्डर की जांच की थी। वाईके की देखरेख में यह मामला खत्म होने की तरह है।" कांग्रेस नेता ने सवाल किया, "कौन आतंकी दविंदर को चुप करना चाहता है और क्यों चाहता है?"

मोदी-शाह क्यों हैं खामोश
इससे पहले राहुल गांधी ने गुरुवार को सवाल किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल चुप क्यों हैं? उन्होंने यह भी कहा था कि दविंदर के खिलाफ त्वरित अदालत में मुकदमा चलना चाहिए और दोषी पाए जाने पर उसे कड़ी सजा दी जानी चाहिए।

जल्दी से हो कार्यवाही
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘उसके खिलाफ त्वरित अदालत में छह महीने के भीतर मुकदमा चलना चाहिए और अगर वह दोषी है तो उसे भारत के खिलाफ देशद्रोह के लिए कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। गांधी ने सवाल किया, दविंदर सिंह पर प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और एनएसए खामोश क्यों हैं ? पुलवामा हमले में दविंदर सिंह की क्या भूमिका थी? उसने और कितने आतंकवादियों की मदद की? उसे कौन संरक्षण दे रहा था और क्यों दे रहा था ?

गृह मंत्रालय ने NIA को जांच शुरू करने को कहा
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गिरफ्तार डीएसपी दविंदर सिंह के मामले की जांच शुरू करने का निर्देश राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को दिया है। दविंदर को शनिवार को जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले से हिजबुल कमांडर के दो आतंकियों और उनके मददगार एक वकील के साथ गिरफ्तार किया गया था। डीएसपी पर आरोप लगा है कि वह आतंकवादियों से मिला हुआ था और उन्हें देश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करता था।

घटनाक्रम से करीब से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि मामला एनआईए (NIA) को सौंपने के लिए जल्द ही औपचारिक अधिसूचना जारी की जाएगी। इससे पहले जम्मू और दिल्ली में आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं।

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अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को हटाए जाने के पांच माह बाद 18 से 25 जनवरी के बीच तीन दर्जन केंद्रीय मंत्री जम्मू-कश्मीर का दौरा करेंगे। गृह मंत्री अमित शाह की पहल पर यह कवायद हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जम्मू-कश्मीर के हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री वहां के लोगों से मुलाकात कर सकारात्मक प्रभावों और सरकार के विकास कार्यक्रमों के बारे में संवाद कर जानकारी देंगे। यात्रा कार्यक्रम को 17 जनवरी को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक में अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।

गृह मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह मंत्री जिला और संभाग मुख्यालयों के साथ प्रमुख स्थानों का दौरा करेंगे। गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने मंत्रियों के इस दौरे के बारे में जम्मू कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रमण्यम को एक पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि गृह मंत्री अमित शाह चाहते हैं कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सभी सदस्य राज्य का दौरा करें और वहां के हालात की जानकारी लेने के साथ लोगों को अनुच्छेद 370 हटाने के बाद के सकारात्मक नतीजों और विकास में आई तेजी के बारे में जानकरी दें।

इस दौरान 51 यात्राएं जम्मू की और आठ यात्राएं श्रीनगर की होंगी। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी 19 जनवरी को रिसाई जिले के पंथाल व कटरा का दौरा करेंगी, जबकि रेल मंत्री पीयूष गोयल श्रीनगर जाएंगे। गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी 22 जनवरी को गंदरबल में व 23 जनवरी को मनिगाम जाएंगे। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद 24 जनवरी को बारामुला जिले के सोपोर में जाएंगे।

अन्य मंत्रियों में वी के सिंह 20 जनवरी को उधमपुर जिले के टीकरी में, किरण रिजीजू 21 जनवरी को जम्मू के सुचेतगढ़ जाएंगे। केंद्रीय मंत्री आर के सिंह डोडा के खेलानी और श्रीपाद यशो नायक श्रीनगर में होंगे। अनुराग ठाकुर, गिरिराज सिंह, प्रहलाद जोशी, रमेश पोखरियाल निशंक, जितेंद्र सिंह, भी विभिन्न हिस्सों का दौरा करेंगे।

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फिल्म 'छपाक' की निर्देशक मेघना गुलजार ने सोमवार को कहा कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) जाकर हमले के शिकार छात्रों के प्रति एकजुटता प्रकट करना उनका निजी फैसला था। उन्होंने निजी और पेशेवर जीवन को अलग रखने की जरूरत बताई। मेघना गुलजार ने दर्शकों से भी अनुरोध किया कि वे नजरिया बदलें और तेजाब हमले की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी पर फिल्म बनाने के कारण को देखें।

'छपाक' फिल्म में दीपिका मुख्य भूमिका में है। यह फिल्म उस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में आयी जब दीपिका छपाक के प्रदर्शन से तीन दिन पहले JNU परिसर में गईं। हालांकि, उन्होंने वहां पर कुछ नहीं कहा। इसको लेकर दीपिका को प्रशंसा के साथ-साथ आलोचना का भी सामना करना पड़ा।

मेघना ने 'पीटीआई-भाषा' को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कार में दीपिका के JNU जाने के मुद्दे पर कहा, 'हमें निजी और पेशेवर जीवन को अलग करने में सक्षम होना चाहिए। कोई अपनी निजी जिंदगी में क्या करता है और पेशेवर की तरह फिल्म में क्या करता है, उसे अलग-अलग देखना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'जब वे निजी और पेशेवर पहलुओं को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं और अगर कोई इस नजरिए में हल्का बदलाव कर यह देखता है कि आखिर हमने क्यों फिल्म बनाई, जिसे हम केंद्र में लाना चाहते हैं... मेरा मानना है कि वह महत्वपूर्ण है।'

उल्लेखनीय है कि 10 जनवरी को छपाक अजय देवगन की फिल्म 'तानाजी: द अनसंग वॉरियर' के साथ रिलीज हुई। मेघना गुलजार ने कहा, 'यह वितरकों का फैसला है और मेरा मानना है कि उनको भरोसा है कि दोनों फिल्में अलग है और उनके दर्शक मिलेंगे।'

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जरूर जानें 15 जनवरी को आयोजित होने वाले आर्मी डे की ये खास बातें



हर साल 15 जनवरी को भारत में सेना दिवस मनाया जाता है। इसी दिन 1949 में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर से भारतीय सेना की कमान संभाली थी। करियप्पा भारतीय सेना के पहले कमांडर इन चीफ बने थे। आजादी के बाद सेना के पहले दो चीफ ब्रिटिश थे। करियप्पा ने जनरल फ्रांसिस बुचर की जगह ली जिन्होंने 1 जनवरी, 1948 से 15 जनवरी, 1949 तक सेना के शीर्ष पद पर अपनी सेवाएं दीं। बुचर से पहले जनरल सर रॉबर्ट मैक्ग्रेगॉर मैक्डॉनाल्ड लोकहार्ट 15 अगस्त, 1947 से 31 दिसंबर, 1947 तक आर्मी चीफ रहे।

किप्पर के नाम से मशहूर करियप्पा ने जब सेना की कमान संभाली तब उनकी उम्र 49 वर्ष थी। चार साल तक आर्मी चीफ के तौर अपनी सेवाएं देने के बाद वह 16 जनवरी, 1953 को रिटायर हो गए।

भारत-पाक आजादी के वक्त करियप्पा को दोनों देशों की सेनाओं के बंटवारे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने पूरी ईमानदारी से निभाया था।

अप्रैल 1986 में उन्हें बेहतरीन सैन्य सेवाओं के लिए पंच-सितारा रैंक फील्ड मार्शल से सम्मानित किया गया। आज तक ये पंच-सितारा रैंक भारतीय सेनाओं में केवल तीन सैन्य अधिकारियों को मिली है- करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स अर्जन सिंह।

ये 8 बातें जरूर जानें-
1. 15 जनवरी को आर्मी डे पर दिल्ली के परेड ग्राउंड पर आर्मी डे परेड का आयोजन होता है। आर्मी डे के तमाम कार्यक्रमों में से यह सबसे बड़ा आयोजन होता है। जनरल ऑफिसर कमांडिंग, हेडक्वार्टर दिल्ली की अगुवाई में परेड निकाली जाती है। आर्मी चीफ सलामी लेते हुए परेड का निरीक्षण करते हैं। ये परेड भी गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा होती है।

2. इस वर्ष तीनों सेनाओं के प्रमुखों के अलावा भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत भी परेड में शामिल होंगे।

3. दिल्ली का परेड ग्राउंड राष्ट्रीय राजधानी के बड़े ग्राउंड्स में से एक है। सम्मान स्वरूप इस ग्राउंड का नाम करिप्पा कर दिया गया। हर वर्ष यहां आर्मी डे सेलिब्रेशन के अलावा कई बड़े कार्यक्रम होते हैं।

4. आर्मी डे पर आर्मी चीफ बेहतरीन सेवाओं के लिए जवानों को सम्मानित करते हैं और उनकी हौसलाफजाई करते हैं। बुधवार को 15 जवानों को गैलेंटरी अवार्ड और 18 बटालियनों को यूनिट सिटेशन्स मिलेगा।

5. परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेताओं को भी आर्मी डे परेड में बुलाया जाता है।

6. इस बार परेड में इन्फेंटरी कॉम्बेट व्हीकल बीएमपी-2के, के9 वज्र-टी आर्टीलरी गन, देश में बनी तोप धनुष, युद्धक टैंक टी-90 के साथ सेना अपना शौर्य का प्रदर्शन करेगी। परेड में 18 अलग अलग कंटीजेंट होंगी।

7. आर्मी परेड में पहली बार एक महिला पुरुष सैनिक टुकड़ियों की परेड का नेतृत्व करेगी। सभी टुकड़ियों की अगुवाई करने वाली तानिया शेरगिल पहली महिला परेड एडजुटेंट होंगी। परेड एडजुटेंट परेड के आयोजन और उसके दिशा-निर्देशन में अहम भूमिका निभाता है। शेरगिल दो साल पहले कॉर्प ऑफ सिग्नल में शामिल हुई थी।

8. आर्मी डे पर आर्मी चीफ अपने राजाजी मार्ग स्थित निवास स्थान पर रिसेप्शन देते हैं जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, कैबिनेट मंत्री, सशस्त्र सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व आर्मी चीफ आदि शामिल होते हैं।

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ऑस्ट्रेलिया में आग के विषय में हुआ एक नया खुलासा

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ऑस्ट्रेलिया में आग से तबाह जंगलों में जिंदगी की नई शुरुआत


ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग को नियंत्रित करने के काम में जुटे दमकल कर्मियों ने बताया कि सोमवार को उस पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। अब वहां पर्यावरण सहित अग्निकांड से सदमे में आए जानवरों को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। भीषण आग पर काफी हद तक काबू पा लिया गया है। हालांकि कुछ हिस्से अब भी जल रहे हैं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही इस पर भी काबू पा लिया जाएगा। इस दौरान बारिश होने की भी संभावना है, जिससे उम्मीद की जा सकती है कि जंगल की आग से बर्बाद हुए ग्रामीण इलाकों को कुछ राहत जरूर मिलेगी। दमकलकर्मियों का कहना है कि न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया राज्य के जंगलों में लगी आग पर बहुत हद तक काबू पाया जा चुका है। यहां पिछले करीब तीन महीने से आग लगी है। न्यू साउथ वेल्स ग्रामीण दमकल सेवा के कमिश्नर शेन फिट्जसिमोंस ने सोमवार को कहा कि आग बुझाने के प्रयास सार्थक होते दिख रहे हैं।

30 हजार कोआला जानवरों की मौत

एचएसआई की वरिष्ठ विशेषज्ञ केली डोनिथान ने बताया कि कंगारू द्वीप पर करीब 50 हजार कोआला थे, लेकिन विशेषज्ञों को आशंका है कि आग के कारण आधे से ज्यादा द्वीप के सुख जाने और वनस्पतियों के नष्ट हो जाने से अब करीब 32 हजार अन्य मवेशियों के साथ 30 हजार कोआला जानवरों की भी मौत हो गई है।

जानवरों की रक्षा के लिए आपदा टीम

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी भीषण आग के कारण 50 करोड़ से अधिक जानवरों की मौत के बीच दक्षिण कंगारू द्वीप पर जानवरों के बचाव एवं राहत के लिए आपदा मिशन शुरू करते हुए सोमवार को एक टीम तैनात की गई। पशु कल्याण संगठन ह्यूमन सोसायटी इंटरनेशनल (एचएसआई) द्वारा गठित आपदा टीम आग में झुलसे, धुएं से प्रभावित एवं भयानक अग्निकांड से सदमे में आए जानवरों की मदद कर रही है।

जंगलों को सहेजने के लिए 2.5 अरब खर्च
ऑस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने आग प्रभावित जंगलों को फिर से वन्यजीवों की रक्षा करने और इस वन क्षेत्र को सहेजने के लिए 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई (2.5 अरब रुपये) डॉलर खर्च करने की घोषणा की है। इस रकम से इस जंगली क्षेत्र को फिर से उसी रूप में विकसित किया जाएगा। ऑस्ट्रेलियन प्राधिकरण के ट्रेजरार जोश फ्राइडेनबर्ग ने इस बारे में जानकारी दी। ऑस्ट्रेलिया के जंगलों पर पूरी तरह काबू पाने के लिए दुनियाभर के लोग एक हजार करोड़ रुपये दान कर चुके हैं जबकि दुनियाभर से 33 हजार वॉलंटियर मदद के लिए पहुंचे हैं।

जानवरों के लिए आसमान से पहुंचाया जा रहा खाना

ऑस्ट्रेलिया में फायर फाइटर और अन्य लोग ज्यादा से ज्यादा जानवरों को बचाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। अंग्रेजी वेबसाइट डेली मेल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आग में एक अरब से अधिक जानवरों की मौत हो गई है। इस वजह से यह जरूरी है कि जो जानवर आग से बचे हैं वो खाना न मिलने के कारण न मरें क्योंकि आग के कारण उनके खाने के स्त्रोत भी खत्म हो गए हैं। इस वजह से जानवरों की जान बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स सरकार ने आसमान से खाना गिरा कर जानवरों को बचाने का जिम्मा उठाया है। इस उद्देश्य से सरकार लगातार गाजर और शकरकंद हेलीकॉप्टर से जंगलों में फेंक रही है। एनएसडब्ल्यू नेशल पार्क सर्विस द्वारा अब तक 2,200 किलो सब्जियां जानवरों के लिए जंगलों में गिराई गई हैं।

ऑस्ट्रेलिया में आग के विषय में हुआ एक नया खुलासा

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ऑस्ट्रेलिया में आग के विषय में हुआ एक नया खुलासा



ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग अब लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कई दिनों से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। 4 महीने से जारी इस आग में करीब 50 करोड़ पशु-पक्षी जलकर मर चुके हैं या गंभीर तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचा। आग का सबसे बुरा प्रभाव कोआला पर पड़ा है। न्यू साउथ वेल्स के मध्य-उत्तरी इलाके में सबसे अधिक कोआला रहते हैं। जंगलों में लगी आग की वजह से उनकी आबादी में भारी गिरावट आई है.

आस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग से दो विद्युत उपकेन्द्रों को क्षति पहुंचने के कारण सिडनी शहर समेत सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में विद्युत संकट खड़ा हो गया है। अधिकारियों ने स्थिति बिगडऩे और ब्लैकआउट की चेतावनी दी है।

ऊर्जा मंत्री मैट कीन ने ट्वीट किया आग की लपटों ने न्यू साउथ वेल्स में तबाही मचाई है और उसने पड़ोसी विक्टोरिया से जोडऩे वाली बिजली की लाइनें तबाह कर दी है। ट्रांसग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल इतालियानो ने कहा कि हम बिजली की आपूर्ती कर पा रहे हैं, लेकिन विद्युत तंत्र पर बहुत दबाव है। अभी तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 36,000 वर्ग किलोमीटर का बड़ा क्षेत्र आग की चपेट में है। गर्मी के मौसम में जंगल में आग लगना आम है।

50 करोड़ से अधिक जानवर और पक्षियों की मौत

 
बता दें कि आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग के चलते अब तक करीब 50 करोड़ जानवर और पक्षियों की जानें जा चुकी हैं। सिंतबर महीने से लगी ये आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। न्यू साउथ वेल्स रूरल फायर सर्विस ने आग को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि जंगलों में लगी इस आग ने नॉवरा के पास उत्तरी किनारे पर खुद की मौसम प्रणाली विकसित कर ली है जो की खतरे की घंटी है। 

प्रभावित इलाकों में आपातकाल की घोषणा
बताया जा रहा है कि ये आग आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के तटीय इलाकों में ज्यादा फैली हुई है। आग के धुएं के कारण आस पास के लोगों का रहना दूभर हो गया है। वहीं आस्ट्रेलिया सरकार ने कई प्रभावित इलाकों में आपातकाल की घोषणा कर दी है।

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगाने वाले बोले-आग लगाना अच्छा लगता है

चार महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग अब तक बुझाई नहीं जा सकी है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के इकोलॉजिस्ट का अनुमान है कि अब तक 50 करोड़ जानवरों की मौत आग में झुलसने से हुई है। मौत होनेवाले जानवरों में स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं। जानवरों को बचाने के लिए भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार रेस्क्यू अभियान चला रही है। जंगल में आग का प्रभाव बढ़ने के बाद राष्ट्रीय पशु कंगारू जान बचाने के लिए शहरों की ओर भाग रहे