अगर कोई बार-बार आपका अपमान करता है तो क्या करना चाहिए, खुद भगवान श्री कृष्ण ने बताया है

कई लोग ऐसे होते हैं, जिन्हें दूसरों का बेवजह अपमान करने में आनंद मिलता है। ऐसे लोग बार-बार सबके सामने किसी ना किसी की बुराई करके उन्हें अपमानित करने की कोशिश करते रहते हैं। यदि आपके साथ भी कोई ऐसा करता है तो ऐसे में आपको क्या करना चाहिए। इसका जवाब खुद भगवान श्री कृष्ण ने दिया है। महाभारत में भगवान श्री कृष्ण और शिशुपाल का प्रसंग प्रसिद्ध है, उसी प्रसंग से हम यह सीख सकते हैं, कि यदि कोई हमारा अपमान करता है तो हमें क्या करना चाहिए।

Third party image reference
शिशुपाल श्री कृष्ण के बुआ का पुत्र था। श्री कृष्ण ने शिशुपाल की माता को यह वचन दिया था, कि वह शिशुपाल की 100 गलतियों को माफ करेगा। लेकिन एक सौ गलतियां पूरी होने के बाद वह उसे उचित दंड अवश्य देगा। जब रुक्मणी का विवाह उसके माता पिता श्री कृष्ण के साथ करना चाहते थे। लेकिन रुक्मणी का बड़ा भाई वह चाहता था कि उसकी बहन का विवाह शिशुपाल के साथ हो, और इसलिए उन्होंने रुक्मणी का टीका शिशुपाल के के यहां भिजवा दिया। रुक्मणी श्री कृष्ण से प्रेम करती थी, और इसलिए उसने श्रीकृष्ण को एक ब्राह्मण के हाथों अपना संदेश भेजवा दिया।

Third party image reference
भगवान श्री कृष्ण भी रुक्मणी से प्रेम करते थे। और यह ये भी जानते थे, कि रुक्मणी के माता-पिता उसका विवाह उनके साथ करना चाहते हैं। लेकिन उसका बड़ा भाई श्री कृष्ण को शत्रु मानता है। जिसके कारण यह वह विवाह नहीं होने देगा। श्री कृष्ण ने इसके बावजूद रुक्मणी से विवाह कर लिया, इस विवाह को शिशुपाल ने अपना अपमान समझा और वह श्रीकृष्ण को अपना शत्रु समझने लगा। कुछ समय बाद युधिष्ठिर ने यज्ञ का आयोजन किया तो उन आयोजन में सभी राजा आमंत्रित किए गए। उस आयोजन में शिशुपाल भी आया था|

Third party image reference
जब देवता की जगह पर श्री कृष्ण का सम्मान और पूजन करते हुए देखा, तो शिशुपाल बहुत ही क्रोधित हो गया और उसने श्रीकृष्ण को अपशब्द कहना शुरू कर दिया। यज्ञ में उपस्थित सभी लोगों ने शिशुपाल को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना अर्जुन और भीम तो शिशुपाल को मारने तक के लिए खड़े हो गए थे। लेकिन श्रीकृष्ण ने उन दोनों को रोक दिया, शिशुपाल लगातार गालियां देता रहा और श्रीकृष्ण उसकी गालियां को गिनते रहे। जब शिशुपाल ने एक सौ अपशब्द कह दिए।

Third party image reference
तब श्रीकृष्ण ने कहा अब तुम रुक जाओ, वरना परिणाम अच्छा नहीं होगा। श्री कृष्ण के समझाने के बाद भी शिशुपाल नहीं रुके और अपने अपशब्द कहता रहा। श्री कृष्ण के समझाने के बाद जैसे ही शिशुपाल ने मुंह से पहला अपशब्द निकाला, श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र से उसका मस्तक काट दिया। इस प्रसंग से हम सीख ले सकते हैं, कि यदि कोई बार-बार हमारा अपमान करता है। तो उसे समझाने का पूरा प्रयास करना चाहिए।

Third party image reference
लेकिन यदि बार-बार समझाने के बाद भी वह व्यक्ति ना समझे और आपके मान सम्मान को ठेस पहुंचाए। तो उसे उचित जवाब देना भी जरूरी है। ऐसे लोगों को चुप करने के लिए हमें श्रेष्ठ काम करना चाहिए। और उसकी बातों को गलत साबित कर देना चाहिए। दोस्तों भगवान श्री कृष्णा और शिशुपाल का यह प्रसंग हमें जीवन में इस तरह के लोगों से निपटने के लिए एक बहुत अच्छी सीख देता है। जिसे अपनाकर हम अपने जीवन में कई परेशानियों को खत्म कर सकते हैं।

Third party image reference
उम्मीद करता हूं दोस्तों, यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी अच्छी लगी तो हमें कमेंट में बताएं। और साथ ही इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें। और ऊपर दिए हुए पीले बटन को दबाकर फॉलो करें।
News Source : UC News

0 Comments:

Adnow

loading...