मोदी की भतीजी से लूट मामले में आरोपी का खुलासा, बताया- लूटने के बाद कहां बांटा माल

पीएम मोदी की भतीजी दमयंती बेन
सिविल लाइंस इलाके में प्रधानमंत्री की भतीजी दमयंती बेन के साथ लूटपाट करने वाले गौरव उर्फ नोनू ने बताया कि सॉफ्ट टारगेट की तलाश में वह तड़के वारदात को अंजाम देने निकले थे। सिविल लाइंस इलाके में उन्होंने देखा कि ऑटो में एक महिला पर्स लेकर बैठी है। 

घटना स्थल से करीब एक किलोमीटर दूर से ऑटो का पीछा किया। जैसे ही महिला ऑटो से उतरने लगी, तो वे लूटपाट कर फरार हो गए। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों सीधे सदर बाजार स्थित बस्ती जुल्हान के मंदिर में पहुंचे। वहां माल का बंटवारा किया। 

दमयंती के कागजात इन लोगों ने मंदिर की छत पर फेंक दिए। बाद में दोनों स्कूटी से सुल्तानपुरी रवाना हो गए। गौरव ने बादल को वहीं छोड़ा और मौसी के घर पहुंचा। जैसे ही मीडिया के जरिये उन्हें पता चला कि उन्होंने बड़ा कांड कर दिया है, तो दोनों सुल्तानपुरी से भाग गए। गौरव सीधा सोनीपत में रिश्तेदार के घर पहुंच गया, लेकिन पुलिस ने उसे वहां से दबोच लिया।

पुलिस की पूछताछ में आरोपी गौरव ने बताया कि उसकी पैदाइश सदर बाजार इलाके की बस्ती जुल्हान में हुई थी। उसके भाई व पिता दोनों को नशा करने की आदत थी, इसी से दोनों की मौत हो गई। उसे भी कम उम्र से नशे की लत लग गई। 

16 साल की उम्र में वह पहली बार झपटमारी के मामले में सदर बाजार इलाके से दबोचा गया। इसके बाद उसके खिलाफ कुछ झगड़े के मुकदमे दर्ज हुए। सदर बाजार के बाद वह नबी करीम के मुल्तान ढांडा इलाके में भी रहा। वहां से सुल्तानपुरी रहने लगा। 

वहीं पर उसकी मुलाकात आकाश उर्फ बादल से हुई। दोनों दोस्त बन गए। 18 साल की उम्र में उसने (गौरव) प्रेम विवाह कर लिया और पत्नी के साथ उत्तम नगर रहने लगा। नशे की लत को पूरा करने के लिए वह लूटपाट और झपटमारी की वारदात को अंजाम देने लगा।

गौरव ने खुलासा किया कि तड़के वह और बादल किसी से मिलने के बाद शिकार की तलाश में निकले थे। सदर बाजार से दोनों सिविल लाइंस इलाके में पहुंच गए। वहां उन्होंने महिला (दमयंती) को देखकर उसे लूट लिया।

24 घंटे में केस सुलझाने का था अल्टीमेटम

प्रधानमंत्री की भतीजी के साथ हुई वारदात के बाद से पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए थे। सूत्रों का कहना है कि खुद सीपी ने सभी वरिष्ठ अधिकारियों से मामले को 24 घंटे में सुलझाने के लिए कहा था। 

स्थानीय पुलिस के अलावा स्पेशल सेल और क्राइम ब्रांच की टीम भी छानबीन में लग गई थीं। मध्य जिला और उत्तरी जिले के स्पेशल स्टाफ के अलावा स्थानीय पुलिस की 25 से अधिक टीमों ने छानबीन शुरू की। 

पुलिस ने 100 कैमरों की सीसीटीवी फुटेज की जांच की। गुजराती समाज भवन के बाहर भी दोनों बदमाश कैमरे में कैद हुए थे। उस फुटेज के आधार पर मुखबिरों ने आरोपियों की पहचान कर ली।
 

बगैर हेलमेट के घूमते रहे बदमाश

वीवीआईपी और दिल्ली के पॉश इलाके में शनिवार सुबह पुलिस सड़कों से नदारद थी। यही वजह है कि बदमाश बगैर हेलमेट के वीवीआईपी इलाके में घूमते रहे। 

खुद उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त मोनिका भारद्वाज ने माना कि शनिवार को जिले में ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी नहीं थी। यदि सड़कों पर पुलिस होती तो शायद बगैर हेल्मेट के घूम रहे बदमाशों को उसी समय पकड़ा जा सकता था। बदमाश सदर बाजार से सिविल लाइंस होते दोबारा सदर बाजार और फिर सुल्तानपुरी पहुंचे। इस बीच किसी ने भी इनको रोकने का प्रयास नहीं किया।
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