भाजपा की इस खूबसूरत नेता ने की किस तृणमूल कांग्रेस के नेता से मुलाकात जानिए



भाजपा की इस खूबसूरत नेता ने की किस तृणमूल कांग्रेस के नेता से मुलाकात जानिए
कोलकाता. जुम्मा- जुम्मा तीन महीने पहले तृणमूल कांग्रेस छोडक़र भाजपा के केन्द्रीय कार्यालय जाकर भगवा खेमे में शामिल हुई बैसाखी बंद्योपाध्याय एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार दिवाली से ऐन पहले उनकी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्य के शिक्षामंत्री पार्थ चटर्जी से दो घंटे तक हुई मुलाकात की चर्चा जोरों पर है। मुलाकात के बाद उनका संवाददाताओं से यह कहना कि उनके पार्थ चटर्जी के साथ व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं। दोनों के बीच कई मसलों पर बातचीत हुई है। डेढ़ घंटे तक चली बैठक के बाद यह कयास लगने शुरू हो गए हैं कि कहीं यह बैठक उनकी और शोभन चटर्जी की तृणमूल कांग्रेस में घर वापसी का कदम तो नहीं है। इस मसले पर पूछे गए सवाल का कोई सीधा जवाब देने से परहेज करते हुए बैशाखी ने कहा कि दूसरी पार्टी में जाने का यह मतलब तो नहीं कि उत्सवों में एक दूसरे को बधाई भी न दे सकें।
भाजपा की इस खूबसूरत नेता ने की किस तृणमूल कांग्रेस के नेता से मुलाकात जानिए
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शिक्षा सेल से जुड़ी रहीं बैशाखी बनी शोभन की खासमखास
तृणमूल कांग्रेस के शिक्षक सेल से जुड़ी रहीं बैशाखी पहले भी तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी के संपर्क में थीं। बाद में तृणमूल कांग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता और तत्कालीन मेयर शोभन चटर्जी से उनकी नजदीकियां बढ़ गईं। जिसके कारण मेयर के व्यक्तिगत जीवन में कई उतार चढ़ाव आए। मामला तलाक के मुकदमे तक पहुंच गया। जिसके बाद मेयर को तृणमूल कांग्रेस में किनारे लगा दिया गया। मेयर की कुर्सी भी चली गई। बाद में शोभन और बैशाखी ने एक साथ भाजपा के दामन थामने की खबरों के बीच पार्थ चटर्जी ने शोभन चटर्जी से मुलाकात कर उन्हें तृणमूल में बने रहने का सुझाव दिया। पर शोभन नहीं माने। जिस दिन दोनों नेताओं ने भाजपा का दामन थामा उसी दिन तृणमूल कांग्रेस की एक और विधायक देवश्री चौधरी भी भाजपा कार्यालय गई थीं लेकिन उनका भाजपा में शामिल होना टल गया। बताया जाता है कि शोभन -बैशाखी के दबाव मे ही देवश्री राय को भाजपा में उस समय इंट्री नहीं मिल पाई थी। उस प्रकरण के बाद भी देवश्री राय को लेकर दोनों नेताओं के रुख के कारण बंगाल भाजपा का एक धड़ा मुखर हुआ था। गर्मागर्म बयानबाजी के बाद मामले के तूल पकडऩे से पहले भाजपा के केन्द्रीय नेताओं के हस्तक्षेप से आग बुझाई गई थी। उसी समय इस बात का संकेत मिल गया था कि बैशाखी और शोभन अपनी शर्तों पर भाजपा का साथ देंगे। जिसपर भाजपा के एक वर्ग के नेता खुश नहीं थे। इसके साथ ही शोभन व बैशाखी दोनों भाजपा की गतिविधियों में सक्रिय भी नहीं दिख रहे थे। अब पार्थ चटर्जी से बैशाखी की मुलाकात के बाद उनकी घर वापसी को लेकर कयासों का दौर एक बार फिर शुरू हो गया है।

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