ऑस्ट्रेलिया में आग के विषय में हुआ एक नया खुलासा



ऑस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग अब लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले कई दिनों से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं। 4 महीने से जारी इस आग में करीब 50 करोड़ पशु-पक्षी जलकर मर चुके हैं या गंभीर तौर पर उन्हें नुकसान पहुंचा। आग का सबसे बुरा प्रभाव कोआला पर पड़ा है। न्यू साउथ वेल्स के मध्य-उत्तरी इलाके में सबसे अधिक कोआला रहते हैं। जंगलों में लगी आग की वजह से उनकी आबादी में भारी गिरावट आई है.

आस्ट्रेलिया के जंगल में लगी आग से दो विद्युत उपकेन्द्रों को क्षति पहुंचने के कारण सिडनी शहर समेत सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में विद्युत संकट खड़ा हो गया है। अधिकारियों ने स्थिति बिगडऩे और ब्लैकआउट की चेतावनी दी है।

ऊर्जा मंत्री मैट कीन ने ट्वीट किया आग की लपटों ने न्यू साउथ वेल्स में तबाही मचाई है और उसने पड़ोसी विक्टोरिया से जोडऩे वाली बिजली की लाइनें तबाह कर दी है। ट्रांसग्रिड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पॉल इतालियानो ने कहा कि हम बिजली की आपूर्ती कर पा रहे हैं, लेकिन विद्युत तंत्र पर बहुत दबाव है। अभी तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग 36,000 वर्ग किलोमीटर का बड़ा क्षेत्र आग की चपेट में है। गर्मी के मौसम में जंगल में आग लगना आम है।

50 करोड़ से अधिक जानवर और पक्षियों की मौत

 
बता दें कि आस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग के चलते अब तक करीब 50 करोड़ जानवर और पक्षियों की जानें जा चुकी हैं। सिंतबर महीने से लगी ये आग बुझने का नाम नहीं ले रही है। न्यू साउथ वेल्स रूरल फायर सर्विस ने आग को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनका कहना है कि जंगलों में लगी इस आग ने नॉवरा के पास उत्तरी किनारे पर खुद की मौसम प्रणाली विकसित कर ली है जो की खतरे की घंटी है। 

प्रभावित इलाकों में आपातकाल की घोषणा
बताया जा रहा है कि ये आग आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया और न्यू साउथ वेल्स के तटीय इलाकों में ज्यादा फैली हुई है। आग के धुएं के कारण आस पास के लोगों का रहना दूभर हो गया है। वहीं आस्ट्रेलिया सरकार ने कई प्रभावित इलाकों में आपातकाल की घोषणा कर दी है।

ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में आग लगाने वाले बोले-आग लगाना अच्छा लगता है

चार महीने पहले ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग अब तक बुझाई नहीं जा सकी है। यूनिवर्सिटी ऑफ सिडनी के इकोलॉजिस्ट का अनुमान है कि अब तक 50 करोड़ जानवरों की मौत आग में झुलसने से हुई है। मौत होनेवाले जानवरों में स्तनधारी पशु, पक्षी और रेंगने वाले जीव सभी शामिल हैं। जानवरों को बचाने के लिए भी ऑस्ट्रेलियाई सरकार रेस्क्यू अभियान चला रही है। जंगल में आग का प्रभाव बढ़ने के बाद राष्ट्रीय पशु कंगारू जान बचाने के लिए शहरों की ओर भाग रहे

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