सजा से बचने के लिए निर्भया के दोषी विनय की नई चाल, याचिका दाखिल कर केजरीवाल सरकार के मंत्री पर लगाए आरोप



विनय ने दी यह दलीलः कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा खारिज की गई उसकी दया याचिका की प्रक्रिया में खामियां और कानूनी कमियां हैं। दोषी विनय ने अपनी याचिका में दलील दी है, जब दिल्ली के मंत्री सत्येंद्र जैन ने उसकी दया याचिका को खारिज करने की सिफारिश की तो उस समय दिल्ली में चुनाव आचार सहिंता लागू थी। ऐसे में मंत्री सत्येंद्र जैन उसकी दया याचिका पर सुझाव कैसे दे सकते थे? (फाइल फोटोः निर्भया कांड का दोषी विनय)

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सत्येंद्र जैन के पास नहीं था अधिकारः निर्भया के दोषी विनय ने अपनी याचिका में कहा कि चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद मंत्री सत्येंद्र जैन के पास यह अधिकार ही नहीं था कि वो दया याचिका को बतौर मंत्री केंद्र सरकार और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेज सकें। विनय की इस याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई संभव है।


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20 मार्च को दी जानी है फांसीः निर्भया के चारों दोषियों (विनय, मुकेश, अक्षय और पवन) को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 20 मार्च सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटकाने का डेथ वारंट जारी किया है। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेद्र राणा ने डेथ वारंट जारी करते हुए कहा था कि दोषियों को 20 मार्च की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जाएगी।

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3 बार टल चुकी है फांसीः निर्भया के चारों दोषी 3 बार फांसी से बच चुके हैं। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सबसे पहले 7 जनवरी को डेथ वारंट जारी किया था। जिसमें दोषियों को 22 जनवरी की सुबह 6 बजे फांसी दी जानी थी। लेकिन कानूनी अड़चनों की वजह से यह फांसी टल गई। जिसके बाद कोर्ट ने दूसरी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 1 फरवरी की तारीख तय की थी। लेकिन दोषियों के कानूनी दांव पेंच के कारण 31 जनवरी को कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए फांसी टाल दी। (फाइल फोटोः निर्भया कांड के चारों दोषी, जिन्हें फांसी दी जानी है।)


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दो बार फांसी टलने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने तीसरा डेथ वारंट जारी करते हुए दोषियों को 3 मार्च को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था। लेकिन यह तारीख भी कानूनी दांव पेंच के कारण आगे बढ़ानी पड़ी। इसके बाद कोर्ट ने चौथी बार डेथ वारंट जारी करते हुए 20 मार्च को फांसी की तारीख तय की है।




16 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाईः सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को दोषी मुकेश की याचिका पर 16 मार्च को सुनवाई करने का निर्णय लिया। मुकेश ने शुक्रवार को अपने वर्तमान वकील एमएल शर्मा के जरिये अपनी पुरानी वकील वृंदा ग्रोवर के खिलाफ कार्रवाई की मांग वाली याचिका दाखिल की थी। याचिका में वृंदा पर दिल्ली पुलिस के साथ मिली भगत कर मुकेश के खिलाफ साजिश करने और जानबूझकर उसकी क्यूरेटिव पिटीशन जल्दी दाखिल करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही वृंदा के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही मुकेश को उसके कानूनी विकल्प दोबारा इस्तेमाल करने का मौका दिए जाने की गुहार लगाई गई है।




नहीं बचा है कोई कानूनी विकल्पः निर्भया के दोषियों के फांसी से बचने के लिए सारे कानून विकल्प खत्म हो गए है। हालांकि दोषी बचने के लिए कोई न कोई तरकीब खोज ही ले रहे हैं। लेकिन चारों दोषियों को मिलने वाले कानूनी विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो गए हैं। अभी तक दोषी इन्हीं विकल्पों के कारण बचते आए है।




कौन हैं निर्भया के चारों दोषी? निर्भया (Nirbhaya) के पहले दोषी का नाम अक्षय ठाकुर है। यह बिहार का रहने वाला है। इसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और दिल्ली चला आया। शादी के बाद ही 2011 में दिल्ली आया था। यहां वह राम सिंह से मिला। घर पर इस पत्नी और एक बच्चा है। दूसरे दोषी को नाम मुकेश सिंह है। यह बस क्लीनर का काम करता था। जिस रात गैंगरेप की यह घटना हुई थी उस वक्त मुकेश सिंह बस में ही सवार था।




गैंगरेप के बाद मुकेश ने निर्भया और उसके दोस्त को बुरी तरह पीटा था। तीसरा दोषी पवन गुप्ता है। पवन दिल्ली में फल बेंचने का काम करता था। वारदात वाली रात वह बस में मौजूद था। पवन जेल में रहकर ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहा है। चौथा दोषी विनय शर्मा है। विनय जिम ट्रेनर का काम करता था। वारदात वाली रात विनय बस चला रहा था। इसने पिछले साल जेल के अंदर आत्‍महत्‍या की कोशिश की थी लेकिन बच गया। (फाइल फोटोः निर्भया से दरिंदों इसी बस में किया था रेप)




क्या हुआ था 16 दिसंबर 2012 को?दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका बस स्टॉप पर 16-17 दिसंबर 2012 की रात पैरामेडिकल की छात्रा अपने दोस्त को साथ एक प्राइवेट बस में चढ़ी। उस वक्त पहले से ही ड्राइवर सहित 6 लोग बस में सवार थे। किसी बात पर छात्रा के दोस्त और बस के स्टाफ से विवाद हुआ, जिसके बाद चलती बस में छात्रा से गैंगरेप किया गया। लोहे की रॉड से क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं। (फाइल फोटोः निर्भया की मां आशा देवी)




दरिंदों ने निर्भया से दरिंदगी तो की ही इसके साथ ही उसके दोस्त को भी बेरहमी से पीटा। बलात्कारियों ने दोनों को महिपालपुर में सड़क किनारे फेंक दिया गया। पीड़िता का इलाज पहले सफदरजंग अस्पताल में चला, सुधार न होने पर सिंगापुर भेजा गया। घटना के 13वें दिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में छात्रा की मौत हो गई।



नई दिल्ली. निर्भया के दोषी फांसी से बचने के लिए लगातार कोई न कोई दांव खेल रहे हैं। दोषी एक बार फिर 20 मार्च को होने वाली फांसी को टालने के लिए कोर्ट के शरण में पहुंचे हैं। चारों दोषियों में शामिल विनय ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें विनय ने दलील दी है कि उसकी दया याचिका खारिज किए जाने में संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

                    

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